- यूनियन बैंक इंडिया द्वारा एफ़सीएनआर (बी) डिपॉज़िट पर ब्याज दरें 6.60% प्रति.वर्ष. तक बढ़ाईं गई
- सांस लेने में गंभीर परेशानी के पीछे छिपी दुर्लभ तंत्रिका संबंधी बीमारी की पहचान, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे में किशोरी का सफल उपचार
- ‘कम बोलो, सीधा कमाल करो’ – रचित सिंह ने नचिकेत सामंत का डायरेक्शन स्टाइल बताया।
- Money can return, health may not: Akshay Kumar on what truly matters
- बूगल बॉलीवुड बैलिस्टिक अवॉर्ड्स 2026 में सीरत कपूर को मिला 'डायनेमिक स्क्रीन प्रेजेंस अवॉर्ड'
विशेषज्ञ ने धूम्रपान छोड़ने के लिए समय पर कदम उठाने और सुरक्षित विकल्प अपनाने पर दिया जोर : , डॉ. राजवर्धन भंवर, इंदौर
जून 2026 | इंदौर : इंदौर में तंबाकू सेवन के स्वरूप में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में तंबाकू सेवन की शुरुआत पहले की तुलना में कम उम्र में हो रही है, जिससे लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं। हाल ही में जिला स्तरीय तंबाकू नियंत्रण कार्यशालाओं में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS) के अनुसार मध्य प्रदेश में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 3 से 9 प्रतिशत छात्र पहले से ही किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि स्कूलों और प्रवर्तन एजेंसियों से मिले संकेत बताते हैं कि नियमों के बावजूद शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता बनी हुई है। इससे बच्चे कम उम्र में ही तंबाकू के संपर्क में आ रहे हैं, जब वे सबसे अधिक प्रभावित होने की अवस्था में होते हैं। इंदौर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल प्रयोग करने की प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि निकोटिन पर दीर्घकालिक निर्भरता की शुरुआत हो सकती है।
माइंडफुल ब्रेन क्लिनिक, इंदौर के डॉ. राजवर्धन भंवर, एमबीबीएस, एमडी (एम्स, दिल्ली) ने कहा, “इंदौर में हम एक स्पष्ट बदलाव देख रहे हैं। बच्चे पहले की तुलना में कम उम्र में निकोटिन के संपर्क में आ रहे हैं। यदि ऐसा किशोरावस्था में होता है, तो इसका असर मस्तिष्क के विकास पर पड़ता है और लत लगने की संभावना अधिक मजबूत हो जाती है। ऐसे में जब ये बच्चे वयस्क होते हैं, तब धूम्रपान छोड़ना उनके लिए कहीं अधिक कठिन हो जाता है।”
वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश वयस्क धूम्रपान करने वालों ने 18 वर्ष की आयु से पहले ही इसकी शुरुआत कर दी थी। यह इस बात को रेखांकित करता है कि समय रहते हस्तक्षेप करना कितना जरूरी है। जागरूकता बढ़ने के बावजूद धूम्रपान छोड़ने की दर अब भी कम है। कई युवा धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन चिड़चिड़ापन, बेचैनी और धूम्रपान की तीव्र इच्छा जैसे विड्रॉल लक्षणों के कारण दोबारा इसकी ओर लौट जाते हैं।
विशेषज्ञ धूम्रपान छोड़ने के लिए अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। डॉ. राजवर्धन भंवर ने कहा, “लोगों के बीच यह एक आम गलतफहमी है कि कैंसर का कारण केवल निकोटिन है। जबकि वास्तव में सबसे ज्यादा नुकसान उन जहरीले रसायनों से होता है, जो तंबाकू को जलाने या चबाने पर शरीर में पहुंचते हैं। निकोटिन लत पैदा करता है, लेकिन तंबाकू के जरिए शरीर तक पहुंचने का तरीका नुकसान का मुख्य कारण बनता है। निकोटिन पैच और निकोटिन गम के रूप में दी जाने वाली निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) विशेष रूप से धूम्रपान छोड़ने में मदद के लिए तैयार की गई है। इसमें नियंत्रित मात्रा में फार्मास्यूटिकल-ग्रेड निकोटिन दिया जाता है, लेकिन तंबाकू में मौजूद हानिकारक विषैले तत्व नहीं होते। इससे लोगों को धूम्रपान की इच्छा पर नियंत्रण पाने और धीरे-धीरे निकोटिन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। खास बात यह है कि जो युवा पहले से धूम्रपान शुरू कर चुके हैं, उनके लिए चिकित्सकीय सलाह के साथ शुरुआती स्तर पर NRT का उपयोग धूम्रपान छोड़ने की संभावना को काफी बढ़ा सकता है और उन्हें जीवनभर की लत से बचाने में मदद कर सकता है।”
इंदौर में तंबाकू नियंत्रण को लेकर प्रयासों के मजबूत होने के साथ प्राथमिकताएं भी स्पष्ट हैं। युवाओं को तंबाकू से बचाना, इसकी शुरुआत को टालना और NRT जैसे सुरक्षित एवं वैज्ञानिक आधार वाले विकल्पों के माध्यम से लोगों को समय रहते धूम्रपान छोड़ने में मदद करना इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य है।


